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Cloud Computing क्या होती है? | Cloud Computing in hindi

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आज टेक्नोलॉजी ने इतनी तरक्की की है जितनी की हम कभी सोच भी नहीं सकते थे। आज हमारे चारों तरफ नए -नए आविष्कार किसी न किसी रूप में कही न कही उपयोग हो रहे है। नई -नई तकनीकें खास कर टेक्नोलॉजी के छेत्र में बरी आसानी से हम आम लोगो के जीवन का हिस्सा बनती जा रही है । आज हम उन्ही में से एक टेक्नोलॉजी की चर्चा करने जा रहे है जिसे की Cloud Computing कहा जाता है।

Cloud Computing क्या है?(What is cloud computing)

cloud computing वह टेक्नोलॉजी है जिसके मदद से एक यूज़र internet के द्वारा काफी सारी ऑनलाइन services का इस्तेमाल अपनी जरुरत के हिसाब से कर सकता है। इन services में खास कर Data storing यानि की अपने अलग-अलग files को स्टोर रखने की जगह जहाँ से उन्हें बाद में इस्तेमाल किया जा सके और दूसरी तरह की service जैसे की Computing service जिसमे की यूज़र अपने हिसाब से internet के माध्यम से किसी भी तरह की मशीन यानि की कंप्यूटर का निर्माण कर सकता है और अपने कंप्यूटर से उस नव निर्मित कंप्यूटर को इस्तेमाल कर सकता है।

जो भी services लोगो के द्वारा internet के माध्यम से  इस्तेमाल की जाती है  उन सब के पीछे भी असली hardware, servers और नेटवर्किंग की जरुरत पड़ती है जो की cloud service उपलब्ध करवाने वाली कंपनियों द्वारा दुनिया के किसी ना किसी हिस्से में रखा जाता है । और इन जगहों को Data centers कहा जाता है। इनके अलावा भी आज के समय में cloud computing की मदद से हम काफी सारे काम कर सकते है और अपनी सुविधा के अनुसार अपनी services को चुन सकते है।

Cloud computing का इतिहास?(History of cloud computing in hindi)

Cloud computing का शिद्धान्त आने से पहले server/client तकनीक का इस्तेमाल किया जाता था जहाँ की एक central storage server  बनाया जाता था और उसमे सारे resources और data को रखा जाता था और अगर किसी यूज़र को उन resources और data  को इस्तेमाल करना हो तो उन्हें पहले उस central server से कनेक्ट होना पड़ता था और उसके बाद ही वह उन सब चीजों को इस्तेमाल कर सकते थे। 

उसके बाद distributed computing का सिद्धांत आया जिसमे की सारे computers एक दूसरे एक साथ नेटवर्किंग की सहायता से जुड़े हुए होते थे और आपस में अपने resources और data का इस्तेमाल करते थे । इसे आसान भाषा में internet भी कहा जाता है। और बाद में इन्ही तकनीकों पे आधारित cloud computing का आगाज हुआ। 

साल 1961 में “John McCarthy” ने MIT में दिए हुए अपने एक भाषण में  कहा की हम computing को ठीक उसी तरह बेच सकते है जैसा की हम बिजली और पानी को बेचते है । ये concept तो काफी अच्छा था पर समय से बहुत आगे था । लेकिन समय के साथ-साथ नई टेक्नोलॉजी आती गयी और इस cloud computing के concept को शक्ल मिलती गयी।

साल 1999 में Salesforce.com ने पहली बार इस concept का इस्तेमाल किया और अपनी ग्राहक कंपनियों को अपने website की सहायता से अपने applications को इस्तेमाल करने का मौका दिया और उस बात को सही साबित कर दिया जिसमे ये कहा गया था की हम computing को भी बिजली और पानी की तरह बेच और इस्तेमाल कर सकते है।

इसके बाद साल 2002 में Amazon  कंपनी ने भी अपनी cloud computing सेवा शुरु की जहाँ की वह storage, computation आदि सुविधाएँ उपलब्ध करवाने लगी । इसके बाद साल 2009 में  Google ने भी अपनी cloud computing सुविधा देने की ओर अपना कदम बढ़ाया।

Cloud computing इस्तेमाल करने के फायदे? (Benefits of cloud computing in hindi)

Cloud computing इस्तेमाल करने के काफी सारे फायदे  है और इस ही कारण आज ऐसी काफी सारी कंपनियाँ है जो की धीरे-धीरे इस टेक्नोलॉजी को अपनाने की ओर आगे बढ़ रही है । तो आइ ये जानते है इस टेक्नोलॉजी के कुछ खास और महत्वपूर्ण फायदे जिनके कारण ये आज काफी ज्यादा इस्तेमाल किये जा रहे है –

High Availability (उच्च उपलब्धता) 

High availability यानि की हर वक़्त मौजूद और हर वक़्त चालू अवस्था में मिलने की सुविधा । इसका मतलब ये है की आप जिस भी cloud service का इस्तेमाल करेंगे वह आपको दिन में ज्यादा तर समय इस्तेमाल करने के लिए उपलब्ध मिलेगी और ऐसा काफी कम या लगभग ना के बराबर ही होगा की आप अपनी services को कुछ ख़राबी के इस्तेमाल ना कर पाए।

Scalability (अनुमापकता)

Scalability का मतलब जब हम अपनी services का इस्तेमाल कर रहे होंगे तब अगर हमारी जरूरत अचानक से बढ़ जाए और हमे अपने रिसोर्सेज को बढ़ाने की जरुरत परे तो हम ये काम बिना किसी परेशानी के बड़ी आसानी से कर सकते है।

उद्धरण के लिए अगर हम किसी storage service का इस्तेमाल कर रहे है और हमे अचानक से 100 GB ज्यादा मेमोरी की जरुरत आ परे तो हम बड़ी आसानी से इसे हासिल कर सकते है और तो और काम हो जाने पे हम इस ज्यादा स्पेस को हटा भी सकते है।

Technical skills (तकनीकी कौशल)

Cloud computing की सुविधाओं को इस्तेमाल करने के लिए हमे ज्यादा टेक्निकल चीज़े जानने की कोई जरुरत नहीं होती क्युकि हम जिन services को इस्तेमाल करते है उनका ज्यादा तर हिस्सा हमे services उपलब्ध करवाने वाली cloud service provider कंपनी द्वारा संभाला जाता है। हम जो भी service इस्तेमाल करते है उनके hardware और servers, जो की service उपलब्ध करवाने वाली कंपनी के किसी न किसी data center में मौजूद है उन सब को हर वक़्त सही रखने का काम उस कंपनी का होता है।

Cost Efficient (लागत कुशल)

Cost एफिशिएंसी का मतलब है कम से कम पैसों में ज्यादा से ज्यादा चीजों का इस्तेमाल । cloud computing पे हमे servers, resources और networking को खुद से सेट उप नही करना पड़ता है और इसी कारण एक यूज़र इन सारे खर्च से सीधा बच जाता है क्युकि अब उससे अपने खुद के servers और machines  खरीदने की जरुरत नहीं पड़ती क्युकि इन सारी चीजों का ध्यान cloud service provider कंपनी रखती है। 

Cloud computing का एक सामान्य बिल्लिंग मॉडल है जिसे की pay-as-you-go मॉडल कहाँ जाता है जो की आज के समय में cloud computing के बेहतरीन सुबिधाओ में से एक है। इस मॉडल के उपयोग से एक यूज़र सिर्फ उतना की पैसा देता है जितना की उसने resources का इस्तेमाल किया होता है।

जैसा की हम जानते है cloud computing में हम अपने resources को अपने काम के अनुसार घटा या बढ़ा सकते है और इस pay-as-you-go मॉडल के तहत हमे सिर्फ उतने का ही पैसा देना होगा जितने समय के लिए हमने अपने उपलब्ध resources को इस्तेमाल किया और अपना काम होने के बाद अगर हमे अपने resources को कम या ज्यादा करना पड़ा तो हमे पैसे भी उसके अनुसार ही देने होंगे।

Security (सुरक्षा)

Cloud computing में हमे काफी अच्छी और बेहतरीन security की सुविधाएँ मिलती है । ये ना सिर्फ हमारे resources और data को अपने servers में सुरक्षित रखता है साथ ही साथ हमारे data को हर वक़्त encrypt यानि की बदले हुए रूप में रखता है ताकि अगर ये किसी के हाथ लग भी जाए तो भी कोई इस data को समझ ही नही पाए।

Cloud computing में हमारे resources और data को बाहरी हमले से ज्यादा से ज्यादा सुरक्षा तकनीकों के मदद से सुरक्षित रखा जाता है ताकि कोई भी हमलावर हमारे data को नष्ट या चोरी न कर पाए । इसी कारण आज की तारीख में बड़ी  से बड़ी कंपनियाँ भी अपने महत्वपूर्ण data और resources को cloud पे रखना पसंद करती है।

Cloud computing के प्रकार? (Types of cloud computing in hindi)

Cloud computing के कई अलग-अलग प्रकार होते है जो की है –

Public Cloud 

इस प्रकार के cloud computing में सारे resources और services को cloud service provider कंपनी द्वारा नियंत्रित किया जाता है। और इन services को काफी सारे organizations एक साथ internet की सहायता से उपयोग कर सकते है। internet पे  किसी browser की सहायता से ये सारे organization पब्लिक cloud से जुड़े हुए होते है।

ये cloud computing का सबसे आम तौर पे इस्तेमाल होने वाला प्रकार है । इसे इस्तेमाल करने के लिए ज्यादा टेक्निकल ज्ञान होने की जरुरत भी नही है क्युकि इसके ज्यादा तर services को provider कम्पनी द्वारा संभाला जाता है।

Private Cloud 

इस प्रकार के cloud computing को किसी प्राइवेट organization द्वारा इस्तेमाल किया जाता है जो की खुद का एक data center बनाती है और उस data center में अपना cloud environment सेट अप करती है। यहाँ सारे resources और data को इस्तेमाल करने वाली कंपनी खुद संभालती है और इन सब पर सिर्फ उस कंपनी का मालिकाना हक़ होता है आर्थात कोई दूसरी organization इन resources को इस्तेमाल नही कर सकती है।

इस प्रकार के cloud को internet के माध्यम से सीधे इस्तेमाल नही किया जा सकता है । और इसे इस्तेमाल करने के लिए तकनीकी जानकारी का होना भी जरूरी है क्युकि इन services को इस्तेमाल करने वाली कंपनी खुद ही मैनेज करती है।

Hybrid Cloud 

ये प्रकार पब्लिक cloud और प्राइवेट cloud का मिला जुला रूप है । इसमें कुछ resources पब्लिक cloud पे चलती है और कुछ प्राइवेट cloud पे । यहाँ वह organization जो इसका उपयोग कर रही है उसका नियंत्रण सिर्फ उन resources पे होता है जो की उनके प्राइवेट cloud पे चल रही होती है और बाकी resources जो की पब्लिक cloud पे चल रही होती है उनको cloud service provider कंपनी द्वारा संभाला जाता है।

इस प्रकार को तब इस्तेमाल किया जाता है जब कोई organization अपने कुछ resources और महत्वपूर्ण data को खुद संभालना चाहती है और इसके लिए वह खुद अपना प्राइवेट cloud सेट उप करती है और बाकी services को पब्लिक cloud पे इस्तेमाल करती है। इस प्रकार को इस्तेमाल करने के लिए तकनीकी जानकारी का होना बहुत जरूरी है क्युकि यहाँ पब्लिक और प्राइवेट cloud दोनों को एक साथ इस्तेमाल किया जाता है जो की काफी पेचीदा काम होता है।

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Cloud service models के प्रकार? (Types of cloud service model in hindi)

Cloud service के कई तरह के models होते है जो कि है –

Infrastructure as a Service (IaaS)

ये सबसे आम तौर पे इस्तेमाल होने वाला cloud computing service है। इसमें cloud service provider कंपनी अपने यूज़र को virtual machines, data storage, नेटवर्किंग और operating system जैसी services को इस्तेमाल करने की सुविधा उपलब्ध कराती है।

इसमें एक यूज़र की ज़िम्मेदारी होती है की वह अपने services को चुने और उन्हें इस्तेमाल करने के लिए तैयार करे। यहाँ यूज़र की ज़िम्मेदारी होती है की वह अपने काम के अनुसार अपना operating system चुने और उसको install करे और अपने applications को भी संभाले।

बाकी इन services को इस्तेमाल करने के लिए जो भी servers और infrastructure की जरुरत परती है उसको उपलब्ध करवाने और संभालने की ज़िम्मेदारी cloud service provider कंपनी की होती है। इस service को hardware-as-a-Service (HaaS) भी कहा जाता है।

Platform as a Service (PaaS)

इस service को ज्यादा तर developers द्वारा इस्तेमाल किया जाता है जहाँ की वह अपने नए-नए applications को बनाते है उसके बाद उनका test करते है और उन applications को दुसरो के इस्तेमाल करने के लिए तैयार करते है।

इस service में infrastructure-as-a-Service की सारी खुबिया है साथ ही साथ यहाँ cloud service provider कंपनी द्वारा operating system को भी manage किया जाता है और यहाँ developers को applications बनाने के लिए development kit भी उपलब्ध करवाए जाते है।

यहाँ एक यूज़र की ज़िम्मेदारी सिर्फ अपने applications की होती है जिसे की वह develop करता है और cloud पे चलाता है। बाकी हर चीज़ को संभालने की ज़िम्मेदारी cloud provider कंपनी की होती है।

Software as a Service (SaaS)

ये एक software service होती है जहाँ की किसी software को cloud service provider कंपनी द्वारा  एक central cloud  server पे रखा और चलाया जाता है और कोई यूज़र इस software को internet और अपने browser की मदद से इस्तेमाल कर सकता है। यहाँ यूज़र अपने लिए subscription लेकर उस application या software को इस्तेमाल कर सकते है। उदाहरण के लिए – Microsoft office 365 , email , इत्यादि। इस service को on-demand software service भी कहा जाता है।

ये service अपने यूज़र को infrastructure के साथ platform और साथ में software की सुविधा एक साथ देती है। इस service में यूज़र सिर्फ applications को इस्तेमाल करते है बाकी सब ज़िम्मेदारी cloud service provider कंपनी की होती है जैसे की सारे infrastructure और application को manage करना और उन्हें maintain करना।

FAQ (Frequently Asked Questions)

Q. Cloud Computing का अविष्कार किसने किया था?

A. क्लाउड कंप्यूटिंग का अविष्कार अमेरिकी कंप्यूटर scientist  “John McCarthy” ने किया था। 

Q. Cloud Computing के नुकसान क्या है?

A. क्लाउड कंप्यूटिंग के नुकसान यह है की, यह सार्वजनिक रूप से डेटा लीक का कारण बन सकते हैं। जिस कारण इसे इस्तेमाल करने वाली कंपनियों को काफी ज्यादा नुकसान भी हो सकता है।

Q. Cloud Computing के क्या उपयोग है?

A. क्लाउड कंप्यूटिंग आपको किसी भी वेब-सक्षम interface से आपकी फ़ाइलों को संग्रहीत करने और उन्हें एक्सेस करने, और सुरक्षित रखने की संभावना प्रदान कर सकता है। और यह web service interface आमतौर पर काफी सरल होते हैं, और यह किसी भी समय और किसी भी स्थान पर, आपके पास उपलब्ध होते है।

Q. क्या Google Docs भी एक तरह का Cloud Computing है?

A. हां, Google डॉक्स भी एक प्रकार का क्लाउड कंप्यूटिंग है। और यह क्लाउड कंप्यूटिंग के सबसे सरल रूप Software as a Service (SaaS) का एक अच्छा उद्धारण है।

आशा करता हूं कि आज आपलोंगों को कुछ नया सीखने को ज़रूर मिला होगा। अगर आज आपने कुछ नया सीखा तो हमारे बाकी के आर्टिकल्स को भी ज़रूर पढ़ें ताकि आपको ऱोज कुछ न कुछ नया सीखने को मिले, और इस article को अपने दोस्तों और जान पहचान वालो के साथ ज़रूर share करे जिन्हें इसकी जरूरत हो। धन्यवाद।


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5 Comments

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